लेखन एक संघर्ष है और मै संघर्ष पसंद करता हूँ। ग़म हो या ख़ुशी ,चाहत या नफ़रत,समर्थन या विरोध ,अभिव्यक्ति ज़रूरी है और ज़रूरत भी। लिखना चाहिए। मन हल्का होता है।अभिव्यक्ति को ज़रुरत इसलिए कहा क्योंकि मानव सभ्यता का अस्तित्व ही सम्पूर्ण इतिहास में अभिव्यक्ति की मांग करता रहा है। वेद लिखे गए। इतिहास लिखा गया। धर्म जो आज भी समस्त संसार में अपने पंख पसारे हुए है चीख चीख कर अभिव्यक्ति की मांग करता है।
लेखन अभिव्यक्ती का सबसे सुन्दर माध्यम है। सुन्दर इसलिए नही कह रहा की शब्दों का मायाजाल इसमें होता है बल्कि इसलिए क्योंकि लेखन की उपज आन्तरिक विचारधाराओं से होती है। मानना ये है की आतंरिक उपज ही मनुष्य की निजी धरोहर होती है बाकी सभी आडम्बर मात्र हैं।स्वस्थ लेखन और नीच लेखन अलग बात है।आज के लिए इतना काफी है बाकी फिर कभी....तब तक आप भी लिखते रहिये..क्योंकि अच्छा लगता है।
Sunday, 1 September 2013
अभिव्यक्ती और लेखन
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