Sunday, 27 October 2013

बहार रुत में


बहार रूत में उजाड़ रस्ते,
तका करोगे तो रो पड़ोगे
किसी से मिलने को जब भी  साजन,
सजा करोगे तो रो पड़ोगे

तुम्हारे वादों ने यार मुझको,
तबाह किया है कुछ इस तरह से
कि जिंदगी में जो फिर किसी से,
दगा करोगे तो रो पड़ोगे

मैं जानता हूं मेरी मुहब्बत,
उजाड़ देगी तुम्हे भी ऐसे
कि चांद रातों में अब किसी से,
मिला करोगे तो रो पड़ोगे

बरसती बारिश में याद रखना,
तुम्हें सताएगी मेरी आंखें
किसी मंदिर की चौखट पे जब,
दुआ करोगे तो रो पड़ोगे

Tuesday, 1 October 2013

दुनिया की भीड़

दुनिया की भीड़ में इन्सां मिले
जितने इन्सां मिले उतने दास्तां मिले।

तबियत की बेरुखी मेरी बेवजह नही
हालात चीखते और इन्सां बेजुबाँ मिले।

राहत नींद  चैन सुकूँ किसने देखा
जितने आशिक  मिले परेशां मिले।

उम्मीद छोड़ रखी है मैंने अपने यारों से
जब भी मिले थामे अपनों के गिरेबाँ मिले।

इक शख्स मिला था वफाओं की सरहदों में
वो भी छोड़ गया जब नए कद्रदां मिले।