दुनिया की भीड़ में इन्सां मिले
जितने इन्सां मिले उतने दास्तां मिले।
तबियत की बेरुखी मेरी बेवजह नही
हालात चीखते और इन्सां बेजुबाँ मिले।
राहत नींद चैन सुकूँ किसने देखा
जितने आशिक मिले परेशां मिले।
उम्मीद छोड़ रखी है मैंने अपने यारों से
जब भी मिले थामे अपनों के गिरेबाँ मिले।
इक शख्स मिला था वफाओं की सरहदों में
वो भी छोड़ गया जब नए कद्रदां मिले।
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